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    Friday, June 8, 2018

    प्रभारी मंत्री के कांतिलाल भूरिया के बारे में दिए बयान को लेकर जिला कांग्रेस ने किया पलटवार..... दूसरों को नसीहत देने से पहले खुद के गिरेबान में झांके - जिला कांग्रेस


    झाबुआ। प्रभारी मंत्री विश्‍वास सारंग द्वारा अपने दिमाग का इस्तेमाल  कर राहुल गांधीजी के पि‍पलिया मंडी के दौरे पर दिए गए भाषण में सांसद कांतिलाल भूरिया का नाम तक नहीं लिए जाने पर उनके अपमान की बात कहना उनकी ओछी मानसिकता को दर्शाता है। जिला कांग्रेस अध्‍यक्ष निर्मल मेहता, जिला पंचायत अध्‍यक्ष सुश्री कलावती भूरिया, सांसद प्रतिनिधि विक्रांत  भूरिया, कोषाध्‍यक्ष प्रकाश रांका, प्रवक्‍ता हर्ष भट्ट, आचार्य नामदेव, साबीर फिटवेल ने प्रभारी मंत्री के इस बयान पर पलटवार करते हुए इसे हास्‍यास्‍पद करार दिया है। जिला कांग्रेस ने संयुक्‍त विज्ञप्ति जारी कर कहा कि कांग्रेस के अध्‍यक्ष आदिवासी एवं आदिवासी संस्‍कृति का पूरी तरह सम्‍मान करते हैं तथा तत्‍कालिन कांग्रेस की केन्‍द्र एवं राज्‍य की सरकारों ने आदिवासियों के उत्‍थान एवं आदिवासी नेताओं के मान को बड़ाया है। सांसद भूरिया को केन्‍द्रीय मंत्री बनाकर एवं राज्‍य में भी कई आदिवासी नेताओं को मंत्री बनाकर उनका सम्‍मान किया है किंतु भाजपा ने आदिवासियों के हितों की उपेक्षा करते हुए उन्‍हें कोई विशेष सम्‍मान नहीं दिया है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जब भाभरा आए थे तब उस दिन 9 अगस्‍त को अपने भाषण में आदिवासी दिवस की बधाई देना तक भी उचित नहीं समझा। इसकी पूरे आदिवासी अंचल में घोर प्रतिक्रिया हुई थी। पिछले तीन दिवस से किसान आंदोलन को कुचलने के लिए प्रभारी मंत्री झाबुआ जिले के दौरे पर हैं। झाबुआ जिला आदिवासी बहुल जिला है और यहां के अधिकतर किसान भी आदिवासी है। ऐसे में वे स्‍वयं पेटलावद के डाक बंगले में एसी रूम जो कि उनके लिए विशेषरूप से तैयार किया गया है में आनंद ले रहे हैं जबकि पेटलावद मंडी में ही आदिवासी किसान 50 पैसे एवं 1 रूपये के भाव से अपना प्‍याज बैचने पर मजबूर हैं। जबकि यही प्‍याज उपभोक्‍ताओं को 10 रूपये से कम में नहीं मिल पा रहा है। किसानों की लागत 5 रूपये किलो  से कम नहीं है यदि किसान को उसकी लागत ही नहीं मिलेगी तो ऐसे में किसान खून के आंसू नहीं रोए तो क्‍या करे। किंतु प्रभारी मंत्री केवल झाबुआ जिले में औपचारिकता निभाने के लिए आते हैं। यदि उनमें किसानों और आदिवासियों के प्रति जरा भी दया की भावना होती तो वे प्रभारी मंत्री होने के नाते किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्‍य दिलाने के लिए प्रयास करते किंतु ऐसा उन्‍होंने कुछ नहीं किया। जिला कांग्रेस ने प्रभारी मंत्री से कहा कि वे दूसरों के गिरेबान में झांकने से पहले अपने गिरेबान में झाके की वे कितने पानी में है और कोई भी व्‍यकतव्‍य देने से पहले अपने आपके बारे में सोंचे कि वे जनता। किसान और आदिवासी के हित में कितना कार्य कर रहे हैं। 

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