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    Sunday, June 10, 2018

    बंद-अंधेरे कमरे में 1 वर्ष से पड़ी शीतल को घर से बाहर निकाला .... संड़ांध मारने लगा है पूरा शरीर .......ना तो समय पर भोजन मिल रहा था और ना हीकर कर रहा था कोई उसकी देखरेख



    झाबुआ। जिले के ग्राम झकनावदा में एक चैकाने वाला मामला सामने आया है। यहां बसंत काॅलोनी में रहने वाली एक युवती शीतल, जो मानसिक रूप से कमजोर होने से उसके माता-पिता ने उसे एक साल तक घर के अंदर बंद कमरे में कपड़ो से बांधकर रख रखा था। युवती को ना तो समय पर भोजन मिल रहा था और ना ही उसकी देखरेख हो रहीं थी। जब इसकी जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं महिला बाल विकास आयोग के प्रदेष अध्यक्ष मनीष कुमट को मिली तो उन्होंने तत्काल अपनी टीम के साथ यहां पहुंचकर इस बालिका को पुलिस की मद्द से रिहा करवाया। बाद उपचार के लिए 108 एंबुलेंस से जिला चिकित्सालय लाए। जहां प्राथमिक उपचार पश्चात् उसे भर्ती किया गया। 
    पूरा मामला इस प्रकार है कि ग्राम झकनावादा में बसंत काॅलोनी में रहने वाले सलीमभाई, जो पशु चिकित्सालय में पूर्व मंे भृत्य के पद पर पदस्थ थे, उन्होंने एवं उनकी पत्नी उषा की दोनो पुत्रियां मानसिक रूप से कमजोर होने से एक पुत्री शीतल उम्र 25 वर्ष को पिछले करीब 1 वर्ष से घर के एक कमरे में कपड़ों के ढेर से बांधकर रख रखा था। उसे ना तो समय पर खाना दिया जा रहा था और ना ही देखरेख की जा रहीं थी। लगातार बंद कमरे में पड़े रहने से शीतल की हालत बद से बदत्तर हो रहीं थी। नियमित देखरेख एवं स्नान आदि नहीं होने के कारण उसके शरीर पर कीड़े पड गए थे एवं शरीर से अत्यधिक बदबू आने लगी थी।
    मानवाधिकार आयोग की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची 
    जब इसकी जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं बाल विकास आयोग के प्रदेष अध्यक्ष श्री कुमट को लगी तो उन्होंने अपनी टीम के आयोग के संभागीय अध्यक्ष निलेष भानपुरिया, संभागीय सचिव अरविन्द राठौर, श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के प्रदेष उपाध्यक्ष जगपालसिंह राठौर के साथ आयोग के जिला उपाध्यक्ष गोपाल विष्वकर्मा एवं जिला सचिव उत्तम गेहलोत तथा युवा पत्रकार नरेन्द्र राठौर को सूचना देकर बुलवाया बाद झकनावदा चैकी पहुंचकर वहां चैकी प्रभारी कुंवरसिंह चैहान एवं पुलिस बल के साथ युवती के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु चिकित्सक डाॅ. एमएल चैपड़ा को लेकर मौके पर पहुंचकर जांच की तो यह घटना सहीं पाई गई।
    उपचार के पैसे नहीं होने से ऐसा करना पड़ा
    जब आयोग की टीम एवं पुलिस द्वारा युवती शीतल को उसके पिता सलीम द्वारा इस तरह से बंद कमरे में रखने का कारण पूछा गया तो सलीम ने बताया कि उनकी दोनो पुत्री जूली और शीतल की मानसिक हालत ठीक नहीं है। शीतल द्वारा अधिक परेषान करने पर उसे बंद कमरे में बांधकर रखना पड़ता था। उपचार के पैसे नहीं होने के कारण वे पुत्री का इलाज अब तक नहीं कर पाए।
    जिला चिकित्सालय उपचार के लिए लाया गया
    बाद युवती को बंद कमरे से रिहा कर आयोग अध्यक्ष मनीष कुमट एवं संभागीय अध्यक्ष निलेष भानपुरिया द्वारा इसकी सूचना 108 एंबुलेंस को दी गई, चूंकि झकनावदा में एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध नहीं होने से झाबुआ जिला चिकित्सालय से 108 एंबुलेंस को आने में करीब एक से डेढ़ घंटे का समय लगा। बाद 108 से उसे उपचार के लिए जिला चिकित्सालय लाया गया। जहां रविवार को अवकाष के दिन ड्यूटी पर आकस्मिक रूप से तैनात चिकित्सक एवं उपस्थित स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा उसका प्राथमिक उपचार किया गया। युवती को एक वर्ष से बंद अंधेरे कमरे में रखे जाने से एवं नियमित देखरेख नहीं किए जाने से उसके शरीर पर कीड़े पड़ गए है एवं पूरा शरीर सड़ांध मारने लगाहै । इस हेतु आयोग अध्यक्ष श्री कुमट एवं संभागीय अध्यक्ष श्री भानपुरिया द्वारा इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर शीतल को प्राथमिक उपचार के पश्चात् उसे अलग से प्रायवेट वार्ड मंे भर्ती करवाया गया। साथ ही उन्होंने जिला प्रषासन एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से युवती के समुचित उपचार करवाने की भी बात कहीं है।

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