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    Tuesday, July 31, 2018

    9 अगस्त को प्रदेश के मुखिया को दिखायेंगे कालें झंडे..... जब जब चुनाव नजदीक आते है तब तब भाजपा को आती है आदिवासियों समाज की याद..... भाजपा के एजेंट के रूप में काम करता है जिला प्रशासन


    झाबुआ। प्रदेश में जब-जब लोकसभा एवं विधानसभा के चुनाव आते हैं तब-तब भाजपा के नेताओं को आदिवासियों की याद आती है तथा भाजपा की सरकार भी चुनाव के समय ही आदिवासियों के लिए चुनावी हथकंडा अपनाकर आदिवासियों को लुभाने का प्रयास करती है। भाजपा को ज्ञात हो चुका है कि आदिवासी समाज भाजपा की वर्तमान सरकार से काफी नाराज है। भाजपा के नेताओं ने अपनी गद्दी का दुरूपयोग कर वर्षों से चली आ रही आदिवासी परंपरा को दरकिनार करते हुए शासकीय स्तर पर दिनांक 9 अगस्त को आदिवासी कल्याण दिवस मनाए जाने का आदेश आदिवासी जिलों के कलेक्टरों को भेज दिया है। पूरे प्रदेश में आदिवासी समाज बिना किसी राजनीति भेदभाव के सभी जन एक मंच पर एकत्रित होकर समाज के हित की बात करते हैं ऐसे में सरकार के द्वारा इस पूर्व आयोजित कार्यक्रमों में व्यवधान डालकर एक नया कार्यक्रम शुरू करने का कार्यक्रम बनाया है। साथ ही मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों को इस प्रकार के आयोजन में भाग लेने के लिए भेजा है। आदिवासी जिले में भारतीय जनता पार्टी ने कोई विकास कार्य नहीं किया है। उक्त बातें आज स्थानीय जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में पत्रकार वार्ता में आदिवासी विकास परिषद के महामंत्री डॉ.विक्रांत भूरिया एवं जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री कलावती भूरिया ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान को चेतावनी देते हुए कहा कि 9 अगस्त को आदिवासी समाज बिना किसी भेदभाव के अपना कार्यक्रम मनाता है ऐसे में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान झाबुआ का दौरा करेंगे तो उनका विरोध किया जाएगा एवं आदिवासी समाज काले झंडे बताने में भी नहीं हिचकेंगे। मुख्यमंत्री एवं भाजपा ने हमेशा आदिवासियों का शोषण ही किया है। आज आदिवासी समाज को भाजपा के कार्यक्रम में सरकारी तंत्र का दुरूपयोग कर जोरजबरदस्ती कर कार्यक्रम में ले जाया जाता है व परेशान किया जाता है। जिला प्रशासन के आलाधिकारी भाजपा के ऐजेन्ट के रूप में काम करते है और स्कूली बच्चों आंगनवाडी कार्यकर्ता आशा कार्यकर्ताओं को एकत्रित कर भाजपा के कार्यक्रम में भीड के रूप में लाते है। आज जिले में भाजपा की आदिवासी विरोधी नीतियों के कारण विकास रूक सा गया है। जिले में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। विकास के नाम पर केवल कागजी कार्यवाही की जा रही है। आदिवासी इलाकों में बच्चों को पड़ाने के लिए न तो शिक्षकों की व्यवस्था है न छात्रावासों की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रावासों में जहरीले जानवर निकलना आजकल आम बात हो चुकी है। सुश्री भूरिया ने पत्रकार वार्ता में जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि 9 अगस्त को आयेाजित कार्यक्रम में अड़ंगे न लगाए। आदिवासी समाज को अपना कार्यक्रम स्वयं के बुते पर करने देंवे। और न ही आदिवासी भाईयों को बिना वजह परेशान करें। नहीं तो आदिवासी समाज जिला प्रशासन का घेराव करने मे नहीं हिचकेगी। इस अवसर वालसिंह मेडा, हेमचंद्र डामोर, रूपसिंह डामोर, नागरसिंह भूरिया, शंकर भूरिया, मनुबेन डोडियार, मालु डोडियार, अविनाश डोडियार, मानसिंह मेडा, राजेश डामोर, आशीष भूरिया, बबलु कटारा, दिव्येश अमलियार, धुमा डामोर सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।

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