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    Wednesday, August 1, 2018

    जो घुम रिये थे विक्रान्त के आगे-पीछे...... वो आज दिखा रिये है उसे आंखें.... जुदाई फिल्म के परेश रावल का किरदार निभा रिये है कुछ हाथ छाप कार्यकर्ता



               सबकों मेरा नमस्कार.... लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ.... भियां कुछ दिन पेले चाय की टपरी मित्र के साथ चाय पी रिया था.... दोनों चाय की चुस्कियां लेते साल के अंत में आने वाले विधानसभा चुनाव की बात कर रिये थे... मित्र केने लगा... भियां अब तो नेताओं का आए दिन जमावाडा लग रिया... मैने किया हां भियां सभी छाप वाले नेता अपना अपना शक्ति प्रदर्शन करने आ रिये है... और साथ में जिले के प्रसिद्ध कडकनाथों पर हाथ भी साफ कर रिये है... ऐसा लग रिया है चुनाव आते आते जिले में कडकनाथ खतम  जायेगे....।

           भियां हंसी ठिठोली करते करते चाय पर चुनाव चर्चा भी खतम हो गी.... तभी दो तीन हाथ छाप कार्यकर्ता चाय की टपरी पर आ गिये...  और मैं मित्र के साथ जब जाने लंगा... तभी अचानक तीनों मेसे एक की आवाज आई.... भियां परिवेक्षक के सामने विक्रांत की कैसी उतारी... मैने तो के दिया.... विक्रांत नी चाईये...।
     मैं वहीं रूक गिया और मित्र को किया.... भियां तुम जाओ मुझे कुछ काम है... और मैं वहीं टपरी के एक कोने में बैठ तीनों की बात सुनने लग गिया.... तीनों बात कर रिये थे.... भियां सब पद विक्रांत ले लेगा तो हम क्या करेंगे.... अब तो दोनों पिता पुत्र को घर का रास्ता दिखाना है...... कब तब इनकों राज करनें देंगे.... ... भियां इस बार तो टिकट मिलती भी है तो इनकों हम हरा देंगे... तभी तीनों मेसे एक केने लगा... मैने तो परिवेक्षक को के दिया... नगर के चुंनाव में इन्होने टीकट बेची है... काफी देर तीनों की चर्चा चलती री.... ।

              भियां तभी मेरे मन में एक बात आ गी... ये तीनों वही है जो कभी विक्रांत के आगे पिछे घुम  भैया... भैया... कर रिये थे... लेकिन ये क्या.... जिन्हे विक्रांत ने काबिल बनाया... जिस जगह पर ला कर खडा किया... आज वो ही उसे आंखे दिखा रिये है.... अब सोचो जिस छाप के नेता के कंधे इस्तेमाल कर आगे बडने वाले कार्यकर्ता... कंधे पर बैठाने वाले के नी हो रिये है तो वो जनता के कैसे होंगे। ...

              तो भियां चाय भी खतम हो गी और धोखेबाजों की चर्चा भी.... अब मैं भी चलता हुं... लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं... विकं्रात की जो आला कमान में छवि है... वो एकदम साफ है.... चुनाव आने में देर है... अंत में टिकट तो उसे ही मिलेगा... लेकिन जो कार्यकर्ता जूदाई फिल्म के परेश रावल का किरदार निभा रिये है... वो क्या करेंगे... मतदान शहर से नी.... गांव गांव से होगा... भियां एक बात और बिता दुं.... विक्रांत पार्टी के कददावर नेता का बेटा है... सालों हो गिये है राजनिती करते करते... और विक्रांत को राजनीतिक दावपेंच देंखते देखते... अभी भी सोच लो... अब जा रिया... जय रामजी की। 

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