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    Thursday, August 2, 2018

    भियां .... कलसिंह के विरोध के पीछे भीतरघाती और जमानत जप्ती...... गांधी छापों के दाम पर रच रहे है प्रपंच.... अपने चटरगुल्लों को भी संभाल लियो


          
      भियां..... सभी को राम राम... दुआ सलाम... जय येसु... सत् श्रीयाकाल और तमाम धर्मालंबियों को उनके धर्मानुसार कही-अनकही का नमस्कार..... भियां एक तो बारिश भी ढंग से नी हो री.... तो दुसरी तरफ इस गर्मी में राजनीति कुछ ज्यादा गरमा री है.... गरमायें भी क्यों न.... साल के अंत में विधान सभा चुनाव जो आ रिये है.... 

            भियां इसी चुनाव को लेकर भाजपा में आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के झाबुआ आगमन के दौरान चालु हो गिया था... बडी संख्या में थांदला से आए लोगों ने और उनका नेतृत्व कर रहे नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष का रास्ता रोक कलसिंग  भाबर पर कई आरोपों के साथ साथ उसे पार्टी का नही.... बहारी व्यक्ति बिता दिया। भियां भाबर पर आरोपों का दौर यहां पर खतम नी हुआ...  उसके बाद से सोशल मीडिया पर भी खुलकर भाबर पर भडास अभी तक निकाली जा री है....।

           भियां मुझे ये सब कुछ मुझे समझ नी आ रिया था .... कि जिसके प्रचार... कलश यात्रा... गैर आदि सभी में हजारों की भीड उमड री थी... उसका अचानक ऐसा विरोध ये हजम नी हो रिया था... तब जाकर मैंने भियां अंदर के खानों की खबर निकाली.... तो पता चला भियां इसके पिछे ता ेएक भाजपा का भीतरघाती जिसने झाबुआ नगर पालिका चुनाव में पैसों के दाम पर भीतर घात किया ... और दुसरा जमानत जप्ती... भियां ये दोनों मिल कर गांधी छापों के दम पर कई प्रपंच रच रिये है..... भियां जमानत जप्ती ये नी समझ रिया है कि अगर पैसों से जनता को खरीदा जाता तो उसकी जमानत जप्त नी होती.... और भीतर घाती भी ये नी समझ रिया है कि उनका दो नम्बर का माल राजस्थान होते हुए थांदला से ही जा रिया है.... अपने नीचे रेले लेकर भियां दुसरों पर आरोप लगाना अच्छी बात नी है.... पेले अपने रेले तो साफ कर लो बाद में दुसरों के करना। 
         
            भियां अब जा रिया.... लेकिन जाते जाते एक बात और बिता रिया हुं... भियां भाबर साहब.... अपने आगे पिछे घुमने वाले चटरगुल्लों को संभाल लो.... वो तुम्हारा नाम लेकर.... जुआ, सटटा... अवैध शराब... और न जाने क्या क्या कारनामें कर रिये है....और पुलिस पर दबाव बनाते हैं .......  कभी कभी आस पास घुमने वाले चटरगुल्ले भी ज्यादा घातक हो रिये होते है.... रही बात भीतरघाती  और जमानत जप्ती की... उन्हे पैसा खर्च करने दो... आज भी जनता तुम्हारे साथ है... अब जा रिया... सभी को एक बार फिर राम राम... दुआ सलाम... जय येसु... सत् श्रीयाकाल........!

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