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    Sunday, August 19, 2018

    वसीम नही राकेश चला रिया है जिस्मफरोशी का काला कारोबार ...... खलील मांग रिया है वसीम से 20 हजार महिना बंदी... 1 लाख 10 हजार में हुआ था तोड


              भियां सबको मेरा नमस्कार.... भियां हर रोज की तरह कल शाम को पान-गुटखा खाने बाजार गिया था... पान खा ही रिया था कि अचानक मित्र का फोन आ गिया...बात इतनी लम्बी हो गई की पता ही नही चला की.... मैं कब चौराहे तक आ गिया हुं...... चौराहे पर बात कर ही रिया था कि पास ही में खडी युवाओं की टोली में से आवाज आई... भाई आज तो माल अच्छा आया है.... जोरदार... युवा मोबाईल में देख खुब खुश हो रिये थे... उन्हे देख मेरा मन भी नी माना... आखिर ये कौन से माल को मोबाइल में देख खुश हो रिये है.... मैने दोस्त को किया भियां अपन थोडी देर से बात करते है... इतना कह कर मैं टोली की तरफ घुमा.... तो दो तीन युवा पेचान के मिल गए.... तो मैं उनकी टोली में जाकर उनके मजाक मस्ती करने लग गिया... मजाकर करते करते मैने युवाओं से आाखिर पुछ ही लिया.... भियां.... कौन से माल की बात कर रिये हो.... मेरे पुछते ही वो थोडा झेप गिये... मैं भी शाणा था... मजाक मजाक में मैंने आखिरकार  जान ही लिया.... बस फि र क्या था... थोडी देर बाद मैं वहां से कल्टी मार निकल गिया...।  भियां बात समझ में आ गी थी.... सुना भी था और पढा भी.... अब मामले की तह तक जाना था.... तो लग गिया... अपने मुखबिरों को फोन लगाने... और आखिर कार मामले की तह तक पहुंच गिया...। 
             भियां बस 2 घंटो में मैंने ऐडी से लगाकर चोटी तक की जानकारी निकाल ली.... सुत्रों ने बिताया जिले सहित कल्याणपुरा... पारा.... फुलमाल में जिस्मफरोशी का काला कारोबार चल रिया है... जिसे वसीम नही कल्याणपुरा का राकेश चलता रिया है...। इस राकेश के संबंध विपक्ष से भी है.... जिसकी वजह से हाल ही में जब कल्याणपुरा के समीप एक ढाबे पर रेट पडी.... तो मामलें में भांजगडी चल गी... और 1 लाख 10 हजार में तोड हो गिया...। 
       भियां विपक्ष से राकेश के अच्छे संबंध होने की वजह से उसने कल्याणपुरा से कुछ दुरी पर स्थित एक ढाबे को अपना मेन अडडा बना रखा है... ढाबे पर माल  तो बाहर से आता है.... लेकिन कल्याणपुरा के एक पुल पर गाडी माल छोड जाती है.... और उस माल को एक वेन में भर कर ढाबे पर परोस दिया जाता है..... और वहीं वहीं से सभी के रास्ते बदल जाते है....। भियां वसीम तो बस नाम था... पुरा खेल तो राकेश खेल रिया था... जो अहिंसा परमों धरम की बात करता है.... वो जिस्मफरोशी का काला कारोबार चला रिया है...। 
           भियां इस बारे में मुझे जानकारी तो पेले से थी... पर कल पुरी जानकारी मिली तो संतुष्टी हुुई.... अभी तो भोत बिताना बाकि है.... बाद में बिताउगा... अब अपन वसीम की बात करते है... वसीम भी ये कारोबार करता है... पर झाबुआ में तो राकेश ही चला रिया है... भियां कल सुत्र मामले की तह तक जाते जाते वसीम तक पहुंच गिये... तब सारी बात सामने आई... सुत्रों ने बिताया... भियां कलमकार बना खलील... वसीम की खुब पीछे पडा है.... ये कलमकार वो है... जिसने एक समीति में सदस्य बनने के लिए अपना नाम वसीम रख डाला....और बन गिया समिति का सदस्य... पेले ये कलमकार बना खलील वसीम के पीछे पडा... उसके नम्बर कबाडे... और करने लग गिया 20 हजार रूपए महीना बंदी देने मांग.... केले लगा अब पीछे नी पडुंगा.... पुरी जानकारी है मेरे पास... निपट जाओगे... आगे क्या होगा मुझे मत केना....।  तो भियां वसीम ने भी कलमकार बने खलील की सारी कुण्डली निकाल ली... अब वो बस खलील की इंतजार कर रिया है....  भियां सुत्र ये भी बिता रिये थे कि .... वसीम के रिया था.... बस 60 रूपए की गोली लगेगी... आगे छोटा  और पीछे बड़ा छेद जायेगा... 
               मैने किया भियां ये तो वसीम और खलील जाने... अपन को क्या... पर भियां जल्द ही ध्यान नी दिया गया तो यहां जिस्मफरोशी का भोत बडा अडडा बन जायेगा... अगर उस दिन राकेश पर लगाम कस दी होती... तो अभी तक ये कारोबार बंद हो गिया होता.... पर 1 लाख 10 हजार की रकम भी बडी होती है... किसी की भी नियत खराब हो जायेगी....। 
            भियां अब मैं चलता हुं... लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं.... अब खलील केगा... मैं लिखना चालु करूंगा तो ... देखना.... झुठी बात फैला रिया है ... सफाई मै ंभोत कुछ केगा...  पर मैं ये के रिया हुं... झुट बोलते तो मुझे आता नी... बस इंतजार कर रिया हुं की तुम कुछ करों.... अब जा रिया जय रामजी की....।

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