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    Wednesday, August 1, 2018

    बैक संचालक ने बैंक से निकाला फर्जी लोन....... पिता ने लगाया आरोप ...... साहब शासकीय नौकरी देने का झांसा देकर संजय ने मेरे बेटे के नाम पर फर्जी लोन निकाला......


    झाबुआ। अगर शासन की योजनाओं को योजना का लाभ देने वाले ही योजना में गोलमाल करने लग जाये तो इसे हम क्या कहेंगे... हम बात कर रहे है मेघनगर की आदिम जाति सेवा सहकारी बैंक के संचालक, संस्था प्रबंधक और शाखा प्रबंधक की मिली भगत के चलते एक किसान के नाम पर रानी दुर्गावती योजना के तहत फर्जी लोन निकाल डाला। जब किसान को इस बात का पता चलता तो किसान ने इस बात की शिकायत प्रधानमंत्री एवं नाबार्ड को ली। जिसके बाद इस फर्जीवाडे को छुकाने के लिए बैंक संचालक, संस्था प्रबंधक और शाखा प्रबंधक ने ताबडतोड इस मामला को छुपाने के लिए लोन भर डाला। लेकिन किसान की इस शिकायत पर ये तीनों बच नही पाए जब बैक शाखा की जिला महाप्रबंधक ने जांच की तो शाखा प्रबंधक और संस्था प्रबंधक प्रथम दृष्टिया पाए गए दोषी.... जिला सहकारी महाप्रबंधक ने बैंक मेनेजर को किया निलंबित और शाखा प्रबंधक को प्रधान कार्यालय किया अटैज कर दिया। 


    शासन की महत्वपूर्ण योजना रानी दुर्गावती के तहत 2010 में  ग्राम आमलीपठार के रहने वाले माधुसिंग पिता खुमानसिंग डामोर के नाम पर ईट भट्टा के कार्य हेतु फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोन लेने से लेकर बैंक से राशी आहरण तक फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से दस लाख रूप का लोन निकाल डाला। इस बात का खुलासा तब हुआ जब जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा मेघनगर के द्वारा एक दिन गलती से वसूली का नोटिस माधुसिंह डामोर के नाम से जारी कर दिया और बैंक कर्मचारी तामील करने माधुसिंग के घर चला गया। तब जाकर उसे पता चला कि जो नोटिस आया है वो लोन उसने लिया ही नही तो नोटिस कैसे आया। जब माधुसिंग ने बैंक में जाकर इस बाते में जानकारी ली तो पता चला की रानी दुर्गावती योजना में ईट भट्टा के लिये दस लाख रुपये का लोन उसके नाम पर दिया गया है। 


    शिकायत के बाद जब जांच के आदेश आए तो जांच के दौरान अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जाँच प्रविवेदन अनुसार आदिम जाती सेवा सहकारी संस्था मेघनगर से तैयार ऋण प्रकरण रानी दुर्गावती योजनान्तर्गत माधुसिंग पिता खुमान डामोर निवासी आमलीपठार के ईट भट्टा लगाने सम्बन्धी प्रकरण में ऋण आवेदनकर्ता की सहमितिध् सन्तुष्टी के बिना ही अनियमित भुगतान किया गया। भुगतान की कार्यवाही में प्रथम दृष्टिया तत्कालीन प्र.शाखा प्रबंधक शाखा मेघनगर मन्नूसिंह खतेड़िया एव तत्कालीन संस्था प्रबंधक मेघनगर शंकरसिह नायक को मुख्य रूप से दोषी पाया गया। उक्त कृत्य गम्भीर दुराचरण की श्रेणी का होने से मन्नूसिंह खतेड़िया प्र.शाखा प्रबंधक शाखा मेघनगर को तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया। और तत्कालीन संस्था प्रबंधक शंकरसिंह नायक को सिर्फ हटाया गया है। 


    वहीं माधुसिंह का आरोप है कि जो मेरे नाम से दस लाख का फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार करने वाले संजय श्रीवास और गणेश प्रजापत है। इनके द्वारा ही मुझे सरकारी नौकरी देने के नाम पर दस्तावेज मांगे थे और उन्ही दस्तावेजों से इनके द्वारा फर्जी लोन निकाला गया। जिसकी मुझे जानकारी भी नही थी। जब बैक से नोटिस आया उसके बाद मुझे पता चला कि मेरे नाम से दस लाख का लोन लिया गया है। इस फर्जी लोन में बैंक का प्रबंधक और संस्था का प्रबंधक व् फिल्ड आॅफिसर की भी मिली भगत है। इसलिये इन सभी पर कार्यवाही होनी चाहिए।
    इनका कहना है- 
    पीडित के पिता ने इस संबंध में शिकायत की थी.. जांच के दौरान प्रथम दृष्टया अनियमित्ता पाई गई। जिसके चलते तत्कालीन संस्था प्रबंधक मेघनगर शंकरसिह नायक को मुख्य रूप से दोषी पाया गया तथा मन्नूसिंह खतेड़िया प्र.शाखा प्रबंधक शाखा मेघनगर को तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया गया।
    पीएन यादव वरिष्ठ महाप्रबंधक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक झाबुआ।

    जब हमारें घर पर नोटिस आया तो मैं अपने बेटे को लेकर तुरंत बैंक गए वहां सुपरवाईजर नागर को हमने बताया उसने तुरंत संजय गणेश को फोन लगाया और हम दोनों को बहार कर दिया और संजय और गणेश के आने के आधे घंटे बाद हमे बुलाया और नागर ने नोटीस फाड कर कहने लगा भुलचुक में तुम्हारे पास नोटिस आ गया है। जब हमने पता लगाया तो हमने इसकी शिकायत की। ये पुरा खेल संजय का ही है।
    खुमान डामोर पीडित का पिता 


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