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    Friday, September 7, 2018

    किसानों के साथी बने ग्रामोफोन की सफलता की एक और कहानी


    इंदौर। मध्यप्रदेश भारत का एक ऐसा राज्य है जहां की तीन चौथाई जनसंख्या कृषि और कृषि से जुड़े व्यवसायों के जरिये अपना जीवनयापन करती है। हालांकि पिछले कुछ सालों पर गौर करें तो पता चलता हैं कि कृषि अब जीवनयापन की सहज संस्कृति की जगह चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा काम बन गया है। एक अध्यन में पता चलता है कि मध्यप्रदेश के कुल 64 लाख किसानों में से 32 लाख किसान कर्ज के बोझ के तले दबे हुए हैं। लेकिन समय के साथ कृषि क्षेत्र में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। सबसे बड़ा बदलाव टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के बाद देखा गया हैं। नई तकनीकों के सहारे देश के कृषि विभाग ने एक नई राह पकड़ ली हैं। देश की कृषि व्यवस्था मसलन, मशीनरी, खाद्य एवं उर्वरक, सिंचाई और बाजार धीरे-धीरे तकनीकी रूप लेते जा रहे हैंैं। 
    किसान तकनीकी सहायताओं की बदौलत कम लागत में अच्छी फसल उगाने में भी कामयाब हो रहे हैं। इसी प्रकार तकनीकी रूप से किसानों को सशक्त बनाने में ग्रामोफोन जैसी मोबाइल एप्लीकेशंस ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। जहां अभी तक किसानों के पास खेती की आधुनिक जानकारी लेना का कोई इंतजाम नहीं था वहीँ अब ग्रामोफोन के जरिए किसान अपनी कृषि संबंधी समस्या का समाधान एक क्लिक पर पा सकते हैं। ये मोबाइल ऐप हिंदी भाषा में किसानों को उनकी हर समस्या का हल सुझाता हैं। इस एप की सबसे ख़ास बात यह हैं कि इससे जुड़े टोल फ्री नंबर पर मिस कॉल कर, किसान खेती से जुडी अपनी किसी भी समस्या का समाधान विशेषज्ञों के जरिये आसानी से पा सकते हैं।
    ग्रामोफोन का इस्तेमाल कर के कई किसानों ने अपनी सफलता की नई इबारत लिखी हैं। इसी क्रम ने तहसील देपालपुर इंदौर के रहने वाले किसान ’बलराम जी दोड़’ बताते हैं कि कैसे उन्होंने ग्रामोफोन एप के इस्तेमाल के बाद फसल के उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की और कैसे उन्हें पहले के मुकाबले अब ज्यादा फायदा हो रहा हैं। लहसुन का उत्पादन करने वाले बलराम जी बताते हैं कि ग्रामोफोन के इस्तेमाल के बाद उन्होंने पिछले साल की तुलना में इस साल 40 फीसदी अधिक लहसुन की पैदावार की। बकौल बलराम जी, “मैंने लगभग 6 बैग लहसुन आधे एकड़ में उगाया, जिसके परिणामस्वरूप मुझे लगभग 81 बैग लहसुन प्राप्त हुआ। यह पिछले साल की तुलना में काफी अधिक हैं। मैं इसके लिए ग्रामोफोन की टीम की तरफ से दिए गए सुझाव व संसाधनों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, क्योंकि इससे पहले लहसुन की पैदावार काफी कम होती थी।“
    बलराम जी के मुताबिक, जहां एक समय एक बैग लहसुन की बुआई करने पर 10 बैग की फसल प्राप्त होती थी वहीँ मौजूदा समय में इन बैग्स की संख्या 14 हो गई हैं। इसके अलावा लहसुन की क्वालिटी भी बेहद उत्तम हैं। इस प्रकार के गुणवत्ता वाले लहसुन की पैदावार पहली दफा ही देखने को मिली हैं।“
    बलराम जी की ही तरह देशभर में ऐसे सैकड़ों किसान हैं जो ग्रामोफोन का इस्तेमाल कर फसल की पैदावार को बढ़ाने में कामयाब हुए हैं और सफलतापूर्वक अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। खेती-किसानी से जुड़ी तमाम समस्याओं के निपटारे के लिए बड़ी संख्या में किसान ग्रामोफोन के साथ जुड़े हैं और लगातार इनकी संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रहीं हैं। 


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