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    Wednesday, October 24, 2018

    मां की भक्ति के नाम पर हो रिया था अधनंगा नाच...... आज फिर चलेगा तेरी बीबी मेरी बीबी का दौर...... भांग और शराब के नशे में हो गिये तीन बार झगडे



             भियां... सभी को राम राम... दुआ सलाम...  जय येसु.... सत् श्री अकाल..... और तमाम धर्मालंबियों को उनके धर्मानुसार कही-अनकही का नमस्कार... भियां देर से ही सही.... पर आपको आज नवरात्रि और दशेरे की शुभकामनाएं दे रिया हुं.... भियां धरम कोई भी हो... लेकिन मां... मां होती है. मां की भक्ति में ही शक्ति हैं.... बहुत दिनों से देख रिया हुं... कही-अनकही जैसी भोत बातें सामने आ री थी... पर भियां नवरात्रि आ गी थी... इसलिए में कही-अनकही नी बना रिया था... तभी तो नवरात्रि और दशेरे की शुभकामनाएं देर से दे रिया हुं....। भियां जहां चारों और मां की भक्ति में लोग डुबे हुए थे... वहीं पैसों के दम पर नगर के हदय में भैया सेठ मित्रंमंडल पांडाल में मां के नाम पर तेरी बीबी मेरी बीबी और अधनंगा नाच का दौर चल रिया था। 

           भियां घुमा फिरा के नी... सीधे सीधे बिता रिया हुं... भियां जिले भर में मां कि भक्ति के लिए नवरात्रि में मां की स्थापना के साथ गरबा पांडाल के आयोजन किए गिये थे.... चारों ओर भियां सभी मां की भक्ति में लिन नजर आ रिये थे...  वहीं खनिज माफिया भैया सेठ  और मित्रमंडल द्वारा माताजी की स्थापना कर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी गरबा रास का आयोजन किया... जहां मां की स्थापना तो की गई थी लेकिन मां की भक्ति कही नजर नी आ री थी। दिख ये रिया था.... कि किसकी बीबी ने कैसे कपडे पहने और उसका कितना शरीर दिख रिया है.... यहां नजरें ऐसी थी.... कि बहन बेटियां नजरों से ही हवस का शिकार हो री थी....। भांग और शराब के नशे में बैठे रसुखदार मां के आराधक तो नही... हवस के पूजारी जरूर नजर आ रिये थे। 

            भियां नगर के हदय में खनिज माफिया भैया सेठ ने गरबा रास का आयोजन किया... इन नौ दिनों में इस गरबा पांडाल में भांग और शराब का खुब दौर चला... तीन बार झगडे भी हो गिये... एक बार तो भैया मित्र मंडल के एक सदस्य ने एक लडकी को छेड दिया... तो उसकी कुटाई भी हो गी.... लेकिन भियां मां के भक्ति के नाम पर ऐसा होना सोचा रहीसों के चोचले ऐसे ही होते है... पर भियां एक बात ये अच्छी नी थी... कि यहां भक्ति के नाम पर दुसरों की बीबियों पर गंदी नजर डाली जा री था.... तेरी बीबी.... मेरी बीबी का दौर चल रिया था... और साथ में अधनंगा नाच भी.... इस पांडाल में भांग और शराब के नशे में किसी की भी बीबी को रसुखदार अपने दिल का टुडा बना रिये थे.... इस बीच गरबे के नाम पर अधनंगा नाच.... बडी शर्म की बात थी.... पर क्या है गांधीछापों के सामने सब नतमस्तक है।

            भियां आज फिर गरबा खेला जायेगा... कईयों की बीबियां नजरों से ही हवस का शिकार हो जायेगी.... पुरी रात भांग का दौर चलेगा.... और मित्र मंडल के कई सदस्यों को माता स्वरूप बहनों से प्रेम हो जायेगा.... भियां गांधीछाप ही सब कुछ नही होते है.... वो भक्ति ही क्या जिसमें पूजा... आराधना की बजाया... हवस हो...। 

              भियां अब जा रिया लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं... अगर तुम्हारी बहन बेटियां को कोई हवस की नजरों से देखे तो क्या होगा... इसलिए केता हुं पैसा तो बहुत है तुम्हारे पास पर इज्जत नही है... और इन पैसों की वजह से ही चटरगुल्ले आगे पिछे घुमते है.... एक बार पैसा खर्च करना बंद कर दो फिर देखो.... अब जा रिया.... एक बार फिर सभी को राम राम... दुआ सलाम...  जय येसु.... सत् श्री अकाल..... और तमाम धर्मालंबियों को उनके धर्मानुसार कही-अनकही का नमस्कार...।

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