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    Thursday, November 1, 2018

    चने खाने से कुछ नी हो रिया नेताजी.... गेंदाल की हार का कारण कहीं तुम तो नही.... पावर में नशें में क्यों छिनी थी गरीब की नौकरी


            भियां सभी को मेरा नमस्कार... लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ... भियां आज मैं जो बिताने जा रिया हुं... वो आपकों सुन कर ऐसा लगेगा की मैं झुठ बोल रिया हुं... लेकिन भियां एक बात बिता दुं ...मैं बात खरी और सच्ची बिताने जा रिया हुं... अच्छी लगे तो ठिक... नही तो दो रोटी ज्यादा खाई लियो....।
    भियां थांदला में चने खाउ नेताजी... के तेवर कुछ अलग ही हैं.... दिन भर चने खा खा कर चेहरे पर ईमानदारी का मुखोटा पहने लोगों को उल्लु बना रिये हैं... पर इस ईमानदार चेहरे के पिछे इस चने खाउ नेता का एक ओर अलग ही चेहरा है... जो भियां कुछ लोगो ही जान रिये है... आपको शायद नी मालुम होगा... 
         भियां जब ये चने खाउ नेताजी अपने पद पर आसिन्न थे... तब भियां इन्होने एक गरीब लाचार बेटी...  जिसकी आंगनवाडी में नौकरी लगनी थी... उसकी नौकरी छिन इन्होने फर्जी दस्तावेज बना कर अपने खुन के रिश्ते वाली बेटी को आंगनवाडी में नौंकरी लगवा दी... खुब विरोध भी हुआ... अखबारों की सुर्खियां भी बनी.... पर उस समय चने खाउ नेताजी पावर में थे... साम... दाम... दंड.. भेद.... लगाकर भियां मामला शांत कर दिया.... ऐसे मामले एक ही नही कई है...  भियां नेताजी.... तब ये मामला मैंने भी उठाया था.... और आप बोखला गिये थे... और विवाद करने पर उतारू हो रिये थे...  ये बात मैं इसलिए के रिया हुं... कि लोगों को भी तो पता चले... की इस चने खाउ नेता का असली चेहरा क्या है। 
          भियां क्षेत्र के कददावर नेता कांतिलाल... जिन्होने यहां इतिहास रचा... वो अपने बेटे को यहां से राजनिती करवाना चाह रिये थे.... लेकिन भिंया पावर जाने के डर से चने खाउ नेताजी ने इसका पुरजोर विरोध किया.... यहां तक कि कांतिलाल को  भला बुला भी कह दिया.... विवाद इतना बडा की कांतिलाल को चने खाउ नेता के सामने हार का सामना करना पडा।  तब न तेरी न मेरी का दौर चला... और गेंदाल को राजनिती करवाने का निर्णय लिया गिया.... लेकिन भियां कुर्सी का मोह अलग ही होता है.... रिश्तेदारी का नाम लेकर... गेंदाल की पीठा में चुरा भौका....रिश्तेदारी का चेला ओढ अंदर ही अंदर गेम खेलता रिया .... जब पता  चला ...दुसरे राजनिती करने वाले दल से लेनदेन हुआ... तो इन्हे लगा की अब गेंदाल जीत जायेगा.... तो अदर ही अंदर अपनी राजनिती करने वाले बागियों को अपनी राजनितीक सलाह देता रहा... अपने दाव पेंच इस तरह से खेले की गेंदाल को हार का सामना करना पडा। गेंदाल समझ रिया है बागियों की वजह से हार  का सामना  करना पड़ा ...... लेकिन असली बात तो उसे मालूम ही नहीं  .......   यकिन नी आ रिया है तो दोनों बागियों से पुछ लो.... फिर भी नही आ रहा है तो अपनी रिश्तेदारी में थोडी खटास डाल दो... पुरा मामला खुद ब खुद सामने आ जायेगा। 
          तो भियां अब में चलता हुं... लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं... पिचर अभी बाकि है... ये तो सिर्फ ट्रेलर  था.... चने खाउ नेता का पुरा चेहरा समय समय पर बिताते रूंगा... और गेंदाल की हार कैसे हुई... ये भी... अब जा रिया... जय राम जी की। 

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