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    Thursday, December 6, 2018

    करोडों की भूमि पर सरकारी महकमें की बदोलत हो गई रजिस्ट्री.... शिकायतों के बाद भी नही हो रही है कार्रवाई.... रात के अंधेरे में हो रहे है हेंडपंप खनन


    झाबुआ। नगर व ग्राम निवेश इंदौर के नक्शे को दरकिनार कर काटी गई गोविंद नगर काॅलोनी में काॅलोनाईजर ने करीब 4 करोड की भूमि की फर्जी रजिस्ट्रियां करवा कर बेच दी। खरीदी बिक्री में शासकीय भूमि को ठिकाने लागाने यहां फिर कागजों में गोलमाल करने में शासकीय अधिकारी भी  शामिल रहे है।  तभी तो नाले की भूमि और बगीचे की जमीन को अधिकारियों की मिली भगत के चलते बेच दिया। जबकि शासकीय दस्तावेज तो कुछ ओर ही कह रहे है। ऐसे में पिछले कई समय यह इस काॅलोनी में अवैध तरीके से मकानों का निर्माण धडल्ले से किया जा रहा है। वहीं हाल ही में आचार संहिता लागु होने क बाद भी हेडपंप खनन की अनुमति कहां से प्राप्त की ये भी कुछ कागजों का फेर ही होगा। 
    इस फर्जीवाडे में नजूल की भूमिका तात्कालीन नगर पालिका परिषद ने निभाई। नतीजन जमीन निजी हाथों में चली गईं। अगर इस घपले की जांच की जाए तो कई अधिकारी व कर्मचारियों के इस भ्रष्टाचार के कारनामें उजागर होगें। 
    ग्रीन बेटल में आने वाली गोविंद नगर काॅलोनी काटने की अनुमति संयुक्त संचालक नगर व ग्राम निवेश इंदौर ने 30 नवम्बर 1995 में दी थी। 47018 वर्ग फीट भूमि पर काॅलोनी काटी जानी थी। संचालक ने नक्शे में 15 फीसदी जमीन गरीबों के लिए आरक्षित की थी। साथ ही 4 हजार वर्ग फीट में बगीचा बनाने के बादेश दिए थे। इसके अलावा ओपन स्पेस और सडकों के लिए जगह निर्धारित की गई थी। लेकिन अधिकारियों की निगरानी की निगरानी में काॅलोनी में इस भूमि की फर्जी तरीके से रजिस्ट्री हो गई। 
    नजूल की टीम ने 17 जुलाई 2015 को काॅलोनी का निरीक्षण किया था। पंचनामें में लिखा गया था कि भूमि बगीचे के लिए आरक्षित है। जमीन पर कोई भी कब्जा नही कर सकता। 
    पंचनामें में लिखा गया था कि भूमि बगीचे के लिए आरक्षित है। जमीन पर काई भी कब्जा नही कर सकता। लेकिन धोखाधडी से 11 हजार 55 स्क्वेयर फीट सरकारी भूमि की भी कागजों में लिपापोती कर रजिस्ट्री होने के बाद 111.52 वर्ग मीटर की रजिस्ट्री 5 सितम्बर 2014 में और की गई। रोचक बात तो यह है जो नाला ग्रीन बेल्ट में आता है वहां भी काॅलोनाईजर ने  अधिकारियों से सांठगाठ कर नाले की भूमि पर भी रजिस्ट्री कर डाली। 
    कई बार हुई शिकायत
    नाले और बगीचे की भूमि को लेकर कई बार रहवासियों ने इस संबंध में आलाधिकारियों को शिकायत भी की थी। हाल ही में एक शिकायकत के बाद अचानक से प्रशासनिक महकमा जागा और वापस लुप्त हो गया। ऐसे में शिकायत करता शिकायत करते ही रह गया। पर हां गांधीछापों के दम पर सरकारी महकमें की मिली भगत के चलते आज भी यहां अवैध निर्माण कार्य धडल्ले से चल रहे है। ऐसे में इस ओर कोई सुध लेने वाला नही है। 
    इतनी शिकायते होनें के बाद कुछ माह पूर्व ही इस भूमि को लेकर कांग्रेस पदाधिकारियों ने इस मामलें को प्रमुखता से उठाया था। लेकिन गांधीछापों के दम पर एक बार फिर इस मामले को दबा दिया गया। रोचक बात तो यह है कि अभी विधान सभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लागु थी लेकिन फिर  भी यहां रात के अंधेरे में हेडपंप खनन हुए। लेकिन प्रशासनिक अमलें को अवगत करवाने के बाद भी इस ओर सुध नही ली गई। 

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