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    Saturday, January 5, 2019

    खाटुश्याम लगायेंगे बेडा पार.... बंटी का होगा बंटाढार..... जल्द ही होने जा रिया है थांदला नरक पालिका में खाली कुर्सी भरी कुर्सी का खेल


    भियां राम... राम... 
          
                 लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ.... भियां अब वक्त बदल गिया है... जनता सब जानने लग गी है... अगर वो कुर्सी पर बैठा सकती है तो भियां... कुर्सी से गिर भी सकती है... ऐसा ही कुछ थांदला में बंटी के साथ होने जा रिया है... भियां पिछले काफी समय से बंटी को लेकर थांदला में विरोध के स्वरों के साथ... बंटी की नरक पालिका में पिक्चर बिगडती जा री है... ऐसे में भियां अंदर ही अंदर खाली कुर्सी भरी कुर्सी के खेल की तैयारी भी जोरों पर चल री है...। 

                  भियां बंटी की नरक पालिका में पिक्चर बिगढती जा री है.... और सुत्रों की माने तो 6 महिनों के बाद बंटी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी आने की खबर सुनने में आ री है... ऐसे में भियां खाली कुर्सी भरी कुर्सी का खेल होना भी तय है.... और इस खेल में भियां जनता तय करेगी की खाली कुर्सी पर बंटी को बैठाना है या नही...।
    भियां अगर बंटी की कुर्सी गई तो... दुसरा विकल्प होगा कौन ... आप ये ही सोच रिये हो न... तो भियां चैराहों पर जो चर्चा चल री है वो ही मैं बिता देता हुं.... भियां पिछले 4 महिनों से नरक पालिका की कुर्सी के लिए बिक्रम खुब फिल्डिंग भर रिया है.... धरम करम हो या नगर का विकास हो.... सब में बिक्रम बढचढ कर हिस्सा ले रिया हैं.... भियां अच्छा तो ये लग रिया है... जो दिन दुखी खाटुश्याम की शरण में अपनी मन्नत या फिर युं कहें दुवा कर बडी आस से उनकी शरण में जाते है... उन्हे खाटुश्याम के दरबार तक पहुंचाने का काम बडी बखुबी से बिक्रम निभा रिया है.... भियां जहां जहां भी खाटुश्याम के कार्यक्रम आयोजित हो रिये है वहां विक्रम अपनी जेब से पैसा खर्च कर श्रद्धालुओं और दिन दुखियों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए वाहनों एवं अन्य व्यवस्था कर रिया है... ऐसे में भियां खाटुश्याम ही विक्रम का लगायेगे बेडा पार... और बंटी का होगा बंटाढार।  

                 भियां आप सोच रिये होंगे... आखिर बिक्रम के पिछे है कौन... भियां सुत्र बिता रिये थे... कि बिक्रम के पीछे... निरंजन भाई है... जो पुरी रणनिती तैयार कर रिया है... भियां निरंजन भाई राजनिती का पुराना चावल है... ऐसे में ये पुराना चावल है इस खेल को आगे बढायेगा... तो भियां जाईयेगा नही इस खाली कुर्सी भरी कुर्सी के खेल में 6 महिनों बाद बडा मजा आने वाला है। 

                    भियां अब आप सोच रिये होंगे.... बंटी के साथ ऐसा क्यों... तो भियां ये बिता दुं... बंटी कोई खराब नी है... लेकिन भियां उसके आसपास घुमने वाले चटरगुल्ले उसकी छवि खराब कर रिये है.... और भियां खास कारण बंटी का थांदला के काली छवि वाले बंटाढार दंपत्ती की गोद में बैठना... उनकी छाया उस पर पढना ही उसके पतन का कारण है... अब जब बंटी का विरोध नजर आने लगा तो वो ही... काली छवि वाले बंटाढार दंपत्ति बंटी का बचाने की बजाय उसकी कबर खोदने में लग गिये है... जनता के चुने हुए बंटी पर बंटाढार दम्पति का का काला साया पढते ही विरोध शुरू हो गिया था... इस काले साये के पढते ही बंटी की कुर्सी भी आग में जल गी... अब भियां सोच लो...।  

              अब भियां जा रिया हुं... लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं... जो दिन दुखियों की सेवा करेगा.... उसका खाटुश्याम ही बेढा पार करेगा.... अब भियां देखना ये है इस खाली कुर्सी भरी कुर्सी के खेल में जीतेगा कौन ... !
    अब जा रिया... जय रामजी की।  

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