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    Saturday, January 12, 2019

    जवानों में खुशी की लहर.... लुगाईयों जैसे बुरा मानने वाला कप्तान जो जा रिया है.... अब फलाना ढिंकणा दिन पौधा रोपण होगा की नी...


            भियां सभी को मेरा नमस्कार.... लो भियां मैं फिर आ गिया कुछ कही-अनकही के साथ.... भियां सत्य... अहिंसा... परमोधम.... मानने वाले कप्तान (चोर पुलिस खेल  का कप्तान )के आते ही ऐसा लग रिया था.... कि अब अपराधों पर अंकुश लगेगा... लेकिन भियां अहिंसा के इस पुजक ने तो जिले को उडता पंजाब बना कर रख दिया...। 

          जूआ... सटटा... हत्या... नशीले पदार्थ... शराब तस्करी... गौ मांस का विक्रय... देहव्यापार... इनके आते ही धडल्लें से चालु हो गिया.... और इन सब से बचने के लिए कप्तान ने समाजसेवा के नाम पर पेडमेन का मुखुटा पहन लिया...। 

          भियां अंदर के खानों की खबर रखने वाले बता रिये थे... कि ऐसा कोई कर्मंचारी नही... जो इनकी प्रताडना से प्रताडित न हुआ हो... लेकिन इनके पद के आगे भियां सब चुप थे... जब इनके जाने की खबर मिली तो कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड गी....। भियां ये खुशी कर्मचारियों में कोई दिवाली से कम नही  है... 

        भियां मैने तो भौत कप्तान देखे... पर पेला ऐसा कप्तान देखा जो लुगाईयों की तरह बात बात पर बुरा मानने लग जाता... भियां बात ऐसी भी नही होती थी कि साजिश रची जाये... लेकिन ये कप्तान तो लुगाईयों से भी बत्तर है... जो छोटी छोटी बातों पर साजिश रच... फंसाने की कोई कसर नही छोडता है....। भियां इतने समय मैने भी देखा और आपने भी... क्या मैं झुठ बोल रिया हुं... कि ये लुगाईयों जैसा करता है... बुरा मानने... और साजिश रचने वाले लक्षण... इस कप्तान में पुरे लुगाईयों जैसे है कि नही। 

         भियां अगर अहिंसा परमोधम मानने वाला ये सच्चा पूजक होता... तो आज वो मासुम जिन्दा होते... जिले के युवा नशे की लत में नी पडते... वो लुट की वारदाते नी होती.... उस बेटी के पेट में मरे बच्चे को इंन्साफ मिल जाता... लेकिन भियां पेडमेन का मुखुटा पहने इस कप्तान ने समाजसेवा का लोगों को ऐसा झांसा दिया कि भियां लोग इसके चक्कर में आ गिये... जब लोगों को इस मुखुटे के पिछे के चेहरे के बारे में पता चला... तो भियां बहुत देर हो चुकी थी। 

           भियां अब जा रिया.... लेकिन जाते जाते एक बात और बिता दुं...   अब कप्तान तो जा रिये है... अब देखना है.... जो फलाना ढिकना दिन पौधे लगाने का संकल्प ले रिये थे... और सोशल मीडिया पर बडी बडी डिंग हाक रिये थे... वो अब फलाना ढिकणा दिन पौधे लगाते है की नी...  अब जा रिया जय राम जी की। 

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