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    Saturday, February 9, 2019

    श्रध्देय पाठकजी उन्हें माफ करना जिनकी ये जिमेदारी थी लेकिन वो निभाने में असफल रहे...... वो कमल के लिए लडे मरे, मगर जिले में कमल उनके लिए झुका तक नही



    झाबुआ। अंचल में भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक जिलाध्यक्ष स्वर्गीय लक्ष्मीनारायणजी पाठक साहब का पूरा जीवन भारतीय जनता पार्टी के लिए समर्पित रहा। पूरे अविभाजित झाबुआ जिला विपरीत राजनीतिक हालातो में उनकी राजनीतिक जीवटता का आज भी गवाह  है। रतलाम जिले की सीमा में बहने वाली माही नदी के इस छोर पर बसे  मठमठ से महाराष्ट्र की सीमा से सट कर बह रही नर्मदा किनारे बसे मथवाड (अब अलिराजपुर जिले में)  तक, तब के अविभाजित झाबुआ जिले में भारतीय जनता पार्टी के ध्वज को गाँव गाँव फलिये फलिये तक स्थापित करने के लिए श्रध्देय पाठकजी ने अपना सारा जीवन खपा दिया।
     अंचल में भाजपा के लिए हजारो जुझारू लगनशील योद्धा गढ़ने वाले पाठकजी वो शख्सियत थे जिन्होंने स्वर्गीय दादा कुशाभाऊ ठाकरेजी,  स्वर्गीय सुंदरलालजी पटवा,  श्रध्देय कैलाशजी जोशी जैसे मूर्धन्य भाजपाई नेतृत्व के साथ कदमताल करके तब जब संचार और आवागमन सुविधाविहीन दौर में अंचल में भाजपा की जड़े गहरी करने में अपना पूरा जीवन झोंक दिया।
    उनके पूर्णतया भाजपा के लिए न्योछावर जीवन पर लिखने को इतना है कि एक पूरी उपन्यास लिखी जा सकती है, लेकिन फिलवक्त मूल बात पर आते है। पिछले महीने श्रध्देय पाठकजी हम सभी को बिलखता छोड़कर महाप्रयाण कर गए। शोकाकुल परिवार, समाज अन्य सामाजिक संस्थाओं ने यथासमय यथासामर्थ्य स्वर्गीय पाठकजी को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करे, लेकिन जिले में पदमस्ती की चादर ताने सोये मदमस्त एक्सीडेंटल भाजपाई  कर्णधारों को इतना समय नही मिल पाया कि वो जिला मुख्यालय ओर मण्डलस्तरो पर चार भाजपाइयों को जुटाकर भाजपा की ओर से स्वर्गीय पाठकजी को श्रध्दा सुमन अर्पित कर सके।
     पता है इस खबर के बाद एक्सीडेंटल कर्णधार अपनी सफाई में आप यह कहेंगे कि हम एक्सीडेंटल विधायकजी के साथ पाठकजी की अंत्येष्ठी ओर पगड़ी रस्म में उपस्थित थे। अगर एक्सीडेंटल ऐसी सफाई देते तो उन्हें यह याद रखना चाहिए अंत्येष्ठी ओर पगडीरस्म पारिवारिक ओर सामाजिक स्तर के कार्यक्रम होते है। जबकि एक्सीडेंटलो की सांगठनिक जिम्मेदारी ये बनती थी कि भाजपा संगठनस्तर पर पूरे जिले में उन्हें श्रध्दासुमन अर्पित करके अंचल में भाजपा की सुदृढ़ता के लिए किए गए उनके कालजयी योगदान से भाजपा की वर्तमान पीढ़ी को भी अवगत करवाते।
    एक्सीडेंटल कर्णधारो को करना तो ये भी चाहिए था की पगड़ीरस्म के अवसर पर प्रदेश संगठन से आग्रह करके पाठकजी की गरिमानुकुल संगठन प्रतिनिधी की उपस्थिती सुनिश्चित करवाते। लेकिन एक्सीडेंटलो के पास इन सब जिम्मेदारियों के लिए समय नही है क्योंकि वो फिलहाल पाठकजी की लगाई हुई बगियां में लगे मलाईदार फल खाने ने व्यस्त है।

    @Editor

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