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    Saturday, February 2, 2019

    झोलाछाप डाॅक्टरों से लक्ष्मी पूजा कर चल देते है अधिकारी....... कल्याणपुरा में झोलाछाप चुस रहा है गरीब आदिवासियों का खुन


    कल्याणपुरा से ओमप्रकाश राठौर की रिपोर्ट....
    आदिवासी बाहुल्य जिला झाबुआ के ग्रामीण ईलाकों में झोलाछाप डाॅक्टरों की भरमार सी हो गई है। जिला मुख्यालय से कुछ ही दुरी पर स्थित कल्याणपुरा में तो झोलाछापों की होड सी लगी हुई है। जो गरीब आदिवासियों का ईलाज के नाम पर खुन चुस रहे हे। जिसकी संबंधित अधिकारियों को शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नही करते। सिर्फ लक्ष्मी पुजा कर चल देते है। 
    ग्रामीण इलाकों  में कुछ लोग झोलाछाप डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज कर रहे हैं और मोटी रकम कमाई कर रहे हैं। ये अघोषित डॉक्टर गरीब आदिवासियों की  जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। बावजूद इनपर कोई शिकंजा नहीं कसा जाता। गांवों में स्वास्थ्य सुविधा की कमी के कारण मजबूरन ग्रामीण अघोषित डॉक्टर से इलाज करा रहे हैं।  कल्याणपुरा व  अंदरुनी क्षेत्रों में जहां पर शासन की स्वास्थ्य सुविधा नहीं पहुंच पाती, वहां पर झोलाछाप डॉक्टर चांदी काट रहे हैं।
    बिना किसी रोक-टोक के ग्रामीणों का इलाज कर रहे हैं। इलाज के लिए ग्रामीणों का स्वास्थ्य केंद्रों में समय पर पहुंचना मुश्किल होता है, जिसके कारण ग्रामीण गांव में मौजूद झोलाछाप डॉक्टर से अपना इलाज कराते हैं। बिना किसी डिग्री के खुद को डॉक्टर बताते हैं। सामान्य टेबलेट और इंजेक्शन खरीदकर यह अपना अवैध कारोबार संचालित कर रहे हैं। कुछ बड़े पंचायतों में तो रेडक्रास के चिन्ह का उपयोग करते हुए डॉक्टर का बोर्ड लगाकर दुकान खोलकर बैठे हैं। 
    फैला रहे संक्रमण
    ग्रामीण इलाकों  में कई प्रकार की बीमारी व संक्रमण का खतरा रहता है, लेकिन ये झोलाछाप डॉक्टर एक ही निडिल का बार-बार उपयोग कर संक्रमण को और फैलाने का काम करते हैं। वनांचल में कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसके कारण मरीजों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।

    नहीं होती कार्रवाई
    वनांचल में अवैध कारोबार कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की जाती। जिला प्रशासन, अस्पताल प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा वनांचल के लोगों का इलाज कर रहे डॉक्टरों की किसी प्रकार की जांच नहीं की जाती। इनके पास डिग्री है या नहीं, डिग्री है भी तो सही है या नहीं। प्रशासन शिकायत करने का इंतजार करती है, जिसके कारण जिले में आज तक एक भी फर्जी डॉक्टर या बिना डिग्रीधारी अघोषित डॉक्टर पर कार्रवाई नहीं हुई है। 

    अंदाजे से कर रहे ईलाज
    झोलाछाप डॉक्टर किसी तरह से डिग्रीधारी नहीं होते। यह किसी डॉक्टर के पास कभी केवल प्रेक्टिस किए होते है और रटे-रुटाए टेबलेट को देकर काम चलाते हैं। ग्रामीणों का इलाज सिर्फ अंदाजे से करते हैं। नब्ज की जानकारी होती नहीं फिर भी नब्ज टटोलते रहते हैं और बीमारी बताते हैं। ग्रामीणों की जान जोखिम में तब पड़ती है जब लंबे समय तक ईलाज के बाद भी बीमारी दूर नहीं होती। ऐसे में शहर के निजी अस्पताल में पैसे पानी की तहर बहाना पड़ता है।    
    बड़ी बीमारियों 
    का इलाज
    झोलाछाप डॉक्टरों का काम ग्रामीण इलाकों  में अब सिर्फ सर्दी-खांसी तक सीमित नहीं है। वह बड़ी-बड़ी बीमारियों का इलाज करने का दावा करके मरीजों के जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। इन डॉक्टरों को किसी का डर नहीं है, जिसके कारण मलेरिया, टायफाइड जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज करते हुए मरीज की जान को खतरे में डाल देते हैं। कुछ नामी दवाइयों के  नाम रटकर संबंधित बीमारी की गोलियां और एक मलेरिया का इंजेक्शन कहकर ग्लूकोज का बॉटल चढ़ा देते।

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