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    Wednesday, March 6, 2019

    राख बुधवार से........ प्रारंभ हुआ चालीसे का पूण्यकाल



    झाबुआ। राख बुध, ईश्वर की ओर लौटने का एक और दिया गया समय है और इस सांसारिक जीवन को ईश्वर का वरदान मानकर इसे एक दुसरे के साथ बाँटने का अवसर है। इस दिन पूरोहित सभी के माथे पर राख मलते है और यह याद दिलाते है कि हम मिटटी है और मिटटी में मिल जाएंगे। यानी हर किसी को एक दिन ईश्वर के अंश में मिला जाना है। आदि वचनों के साथ आज झाबुआ डायोसिस के गिरजाघरों में चालीसें का पूण्य काल राख बुधवार से प्रारंभ हुआ। स्थानीय कैथोलिक महागिरजा घर में सुबह फादर इंम्बानाथन और फादर जाॅनसन और शाम को  फादर प्रताप बारिया,  फादर माईकल,  फादर राॅकी शाह, ने राख बुधवार की पवित्र विधियां पूर्ण कर पवित्र मिस्सा अर्पित की। इस पवित्र मिस्सा में भाग लेने के लिए बडी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए।
    अपने उदबोधन में फादर प्रताप बारिया ने कहा कि ये 40 दिन का उपवास राख बुधवार से शुरू होकर गुड फ्राईडे पर समाप्त होगा। इस समयावधि में समाजजन अपने धार्मिक और आत्मिय क्रियाकलापों के साथ आत्मशुद्धी और चरित्र सुधार करने का प्रयास करें और अपनी बुरी आदतों को पीछे छोडकर, नये बदलाव के साथ अपनी गलतियों के लिए प्रभु येसु से क्षमा मांगे। येशु के बताए मार्ग को अपनाते हुए जिस तरह बाईबिल में येसु ने कहा है कि अपने पडोसियों को अपने समान प्यार करों। मानवीय प्रेम हमें ईश्वरीय प्रेम से जोडकर रखता है।
    डायोसिस पीआरओ फादर राॅकी शाह ने बताया कैथोलिक चर्च के केलेंडर के अनुसार आज से चालीसे का पूण्य समय राख बुधवार से शुरू हो गया हैं। आज विश्व भर की सभी गिरजाघरों में विशेष प्रार्थना एवं मिस्सा अर्पित किए जा रहे है। राख बुधवार का यह विशेष दिन इस बात के लिए विशेष है, जली हुई राख आज के दिन सभी कैथोलिक ईसाइ भाई बहनों के माथे पर कु्रस के चिन्ह के रूप में अंकित की जाती है। यह राख इस बात को दर्शाती हैं कि हम सभी मनुष्य मिटटी से बने है और एक दिन मिटटी में मिल जायेगें। मनुष्य अपने जीवन काल में बहुत सारी उपलब्धियां अर्जित करता है और कभी कभी उन उपलब्धियों के कारण वह यह भूल जाता हैं कि यह सब क्षणभंगुर है। हम सभी खाली हाथ आयें हैं और खाली हाथ ही हमें लौटना है।
    सभी गिरजाघरों में आज से विशेष पूजन विधि अगले 40 दिनों तक चलेगी। जिसे चालिसे काल की पूजन विधि कहते है। इन पूजन विधियों में विशेष प्रार्थनाओं और खास तौर पर चूने गए बाईबिल से पाठो का वाचन किया जा है। इन 40 दिनों तक विशेष मनन चिंतन किया जाएगा। उक्त जानकारी  समाज के निकलेश डामोर ने दी। 

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