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    Tuesday, March 5, 2019

    महेन्द्र हामड किसान सम्मान नीधि के पात्र ही नही.... मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए रचा प्रपंच .... किसानों को है आपत्ती


    झाबुआ। मिडिया में बने रहने का चस्का इस प्रकार का चढता है कि आदमी झूठे सच्चे दावपेंच खेल कर भी समाचारों की सुर्खियों में बना रहना चाहता है। ऐसा ही काम किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष महेंद्र हामड ने किया। उन्होंने समाचार की सुर्खियां बटोरने के लिए एक पत्र प्रधानमंत्री के नाम लिख कर किसान सम्मान निधि जवानों पर खर्च करने और पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात लिख दी। किंतु महेंद्र हामड स्वयं ही योजना की पात्रता में नहीं आते है और उन्होंने इस संबंध में किसानों से भी कोई चर्चा नहीं की है। 
    नहीं आते पात्रता श्रेणी में।
    किसान नेता महेंद्र हामड अपना नाम बडा करने के लिए किसान सम्मान निधि की राशि सैनिकों को देने की बात करते है लेकिन वास्तव में वे स्वयं पात्रता श्रेणी में नहीं आते है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि उसी किसान को मिल सकती है जिसके पास कुल दो हेक्टयर से कम कृषि भूमि हो लेकिन राजस्व विभाग के अनुसार महेंद्र हामड एवं उनकी पत्नी के नाम रूपगढ,पेटलावद,करडावद और कोदली में कुल 2 हेक्टयर से अधिक जमीन है। इस तरह महेंद्र हामड स्वयं इस योजना के हितग्राही नहीं है। तो कैसे वे अपने को मिलने वाली राशि सैनिकों को दान कर सकते है। यह सरासर मिडिया के माध्यम से प्रचार हासील करने का ओछा तरीका है। 
    किसानों को है आपत्ती 
    किसान सम्मान निधि की राशि प्रधानमंत्री को देने बाबत बयान के बाद कई किसानों ने  इस पर आपत्ती ली है उनका कहना है कि हामड ने यह घोषणा करने से पहले इस बारे में उनसे कोई राय नहीं ली। और बाले बाले यह पत्र लिख दिया है। जबकी कई किसान ऐसे है जो कर्ज में डूबे हुए है तथा उन्हें सम्मान निधि में मिलने वाले पैसों की बडी आवश्यकता है। किसानों का यहां तक कहना है कि हमें पता नहीं हामड ने किससे पूछ कर यह घोषणा की। किसान यूनियन यदि एक लोकतांत्रिक संगठन है तो उसमें किसानों की राय भी ली जाना चाहिए। किसानों का यहां तक भी कहना है कि अपनी महत्वकांक्षा की पूर्ती के लिए हामड किसान यूनियन का उपयोग करते है। तथा कुछ जिले के कथित मिडिया मुगल से मिलकर थोथी हवा बाजी करते है। इससे जिले के किसानों की छवि भी खराब होती है।  
    पेटलावद के किसान महेंद्र हामड जो की किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष है। इन्होंने अपना नाम करने के लिए किसानों के प्रतिनिधि बनने का ढोग रचते हुए प्रधानमंत्री के नाम पत्र लिख कर किसान सम्मान राशि सेना को देने का पत्र लिख दिया। किसान हामड इस योजना में पात्रता नहीं रखते है। उनके परिवार का कोई भी सदस्य इस योजना में पात्रता नहीं रखता है। रेकार्ड के अनुसार उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता है। किंतु महेंद्र हामड ने केवल झांकी बाजी के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर किसानों की राशि सैनिकों को देने की बात कहीं। 
    इस मामले में किसानों ने हामड का विरोध किया है। किसानों का कहना है कि हम हमारे देश के जवानों का सम्मान करते है किंतु इस प्रकार केवल नाम चलाने के लिए बिना किसानों ने पूछे इस प्रकार का पत्र लिखने का अधिकार उन्हें नहीं है। यहां तक की हामड योजना में भी नहीं आते है। यह पत्र लिखने के पहले क्या उन्होंने किसी भी किसान से इस संबंध में चर्चा की है। हर बार इसी प्रकार की हरकते कर समाचारों में बने रहने के लिए केवल यह ढोंग करते है। 
    इस संबंध में जब हामड का जमीन रेकार्ड देखा गया तो उनका नाम पर पेटलावद,करडावद और रूपगढ सहित इनकी पत्नी के नाम पर कोदली में 1.80 हेक्टयर जमीन है। जो की योजना में नहीं आ रहे है। इनकी पत्नी भी इस श्रेणी में नहीं आती है तो फिर यह किस प्रकार प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर किसानों के पैसों को अन्यत्र देना चाहते है। 

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