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    Tuesday, March 5, 2019

    महाश्यजी के उद्देश्य को पलीता लगाते उन्ही के स्कूल प्रबंधक


    पेटलावद से निलेश सोनी की रिपोर्ट ......... 
    बामनिया । आदिवासी बाहुलय छेत्र में सेवा के उद्देश्य के साथ प्रारंभ बामनिया स्थित महाशय धर्मपाल आर्य विद्या निकेतन अपने लक्ष्य से भटकता जा रहा है। जहाँ पर स्कूल में प्रबंधन बच्चो के प्रति क्रूर व्यवहार रखता है । अभिभावक सरकारी स्कूलों में अपने नोनिहलो को नहीं भेजते हुए। निजी स्कूलों में अपने बच्चों को भारी फीस व अन्य खर्च वहन करते हुए इस मंशा में बच्चे का दाखिला निजी विद्यालय में करवाते हैं । ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके । पर नन्हे हाथो में स्कूल प्रबंधन ने सफाई का एवं अतिथि के कुर्सी लगाने का काम सोप दिया। यह नजारा शाला में आयोजित प्रतिभा सम्मान एवं संस्कृति कार्यक्रम के आयोजन में देखने को मिला । यहाँ विद्यालय में पड़ने वाले बच्चों के लिए बैठने की व्यवस्था नीचे थी । वही सांस्कृतिक कार्यक्रम में आने वाले अतिथि के लिए लगने वाली कुर्सी  प्रबंधन ने बच्चों से लगवाई । जहाँ बच्चों से ही वहाँ आने वाले अतिथियो की कुर्सी रूम से उठवा कर कार्यक्रम स्थल तक मंगवा कर लगवाई गई । कुर्सी लगाने का तथा सफाई का जिम्मा शाला में पड़ने वाले विद्यार्थियों को दिया गया। महर्षि दयानंद आर्य दिल्ली द्वारा संचालित इस विद्यालय का नाम तो काफी बड़ा है । किंतु अब अंदर से अनुभव करने पर नाम के अनुरूप स्कूल प्रबंधन बच्चो से ही काम करवाने पर तुला है। जबकि विद्यालय के मेंटेनेंस के लिए यहाँ कर्मचारियों की फ़ौज है। यु तो पहले भी कई बार विद्यालय प्रबंधन सुर्खियों में रह चुका है। चाहे वह एक बच्चे को स्कूल से बिना किसी उचित कारण के निकलने का मुद्दा हो या विद्यालय की जमीन से जुड़ा विवाद हो । जमीन विवाद में भी फरियादि को सही होने के बाद भी उसकी जमीन के पैसे लेने में पसीने आ गए थे।

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